नगर प्रतिनिधि,संतनगर
प्राप्त जानकारी अनुसार जी-४ प्रेमचंदानी मार्ग पर रहने वाले गोबिंदराम डुलानी जिनकी घर के बाहर ही चाय की दुकान है उनके दो बेटे व दो बेटिया ंहै दो बेटियों के बाद बेटा दिनेश डुलानी (बाबू) जिसकी आयु १७ वर्ष है और वो भी कपड़े की दुकान पर कार्यरत था गोबिंदराम ने उसके लिए ही १२ दिन पहले एक्टिवा वाहन लिया था कुछ दिनों से दिनेश पड़ोस में ही गाड़ी चलाना सीख रहा था शुक्रवार सुबह को भी वो घर से एक्टिवा लेकर निकला पर किसे पता था कि वो घर वापस नहीं आएगा। दिनेश एक्टिवा लेकर पहुंचा जहंा से उसने अपनी चचेरी बहन के बेटे वैभव कालरा पुत्र राकेश कालरा आयु १४ वर्ष जो की ८वीं कक्षा में पढ़ता था उसे लेकर मुख्य मार्ग पर चक्कर देने निकल गए। एक्टिवा से दोनों बीआरटीएस कॉरीडोर से हलालपुर की ओर जा रहे थे जब दोनों टी वार्ड स्थित टीवीएस शोरूम के पास पहुंचे तो भोपाल से आ रही लो फ्लोर बस क्रमांक एमपी ०४ पीए १९१२ की चपेट में आ गए। जिसमें मामा भांजे की मौत हो गई है। बस व एक्टिवा की भिड़त इतनी तेज थी कि एक्टिवा वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। वैभव कालरा की घटना स्थल पर ही मौत हो गई और दिनेश ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद बस चालक फरार हो गया पुलिस ने बस को जब्त लिया है।
निगम वाहन से भेजा हमीदिया अस्पताल
शुक्रवार प्रात: ८.३० बजे हुई घटना में घायल दोनों नाबालिगो को लोगों की मदद से नगर निगम की जीप में हमीदिया अस्पताल भेजा गया पहले घायलो को पास स्थित निजी चिकित्सालय लाया गया जहंा से दोनो को हमीदिया रिफेर कर दिया गया। बताया जाता है कि रास्ते में ही वैभव ने दम तोड़ दिया था। वहीं दिनेश ने उपचार के दोरान दम तोड़ा। एक्सीडेंट में दोनों की मौत अंदरूनी चोट आने से गई है। अगर तत्काल उपचार मिल जाता तो दोनों की जान बच सकती थी पर होनी को कुछ और ही मंजूर था।
सड़क पर दौड़ती रही बच्चे की मां
आम दिनों की तरह शुक्रवार को भी दिनेश की मांग घर पर काम कर रही थी तभी किसी ने उन्हें एक्सीडेंट की सूचना दी और सब कुछ छोड़कर सड़क पर दौड़ती हुई महिला घटना स्थल पर पहुंची। सड़क पर अपने बेटे बाबू को पुकारती हुई पास के अस्पताल पहुंची। बेटा वहंा नहीं होने पर मां पड़ोसी के साथ हमीदिया अस्पताल पहुंची।
पापा ने किया अकेले जाने के लिए मना
सुबह को जब दिनेश अकेला एक्टिवा लेकर जा रहा था तो पिता गोबिंदराम ने बेटे दिनेश को अकेला जाने से मना भी किया था पर बेटे ने उनकी बात नहीं मानी और वो यह कहकर चला गया कि पड़ोस से ही चक्कर लगाकर आ रहा हंू पर पिता को क्या पता था कि वो वापस लौटकर नहीं आएगए। पिता का रो-रो कर बुरा हाल है और कह रहे है कि काश की बाबू ने मेरी बात मान ली होती तो ऐसा नहीं होता। परिवार की खुशियां गम में बदल गई है।
वैभव चार भाईयों में सबसे बड़ा
दिनेश के साथ राकेश कालरा का १४ वर्षीय बेटा वैभव भी गया था जो की चार भाईयों में सबसे बड़ा है राकेश भोपाल में हाडवेयर की दुकान पर कार्य करता है माता गीतू गृहणी है जो की दाणी माया श्री रेस्टोरेंट के पास रहते है आम दिनों की तरह ही वैभव शुक्रवार को स्कूल गया था जो अब घर वापस नहीं लौट पाएगा।
छोटे भाई की आंखो में आंसू, मां को कहा मत रो…
दोनो ही परिवारों में जहां बड़े गम में डूब गए है वहीं दिनेश का छोटा भाई रोहित की आंखो से आंसू नहीं थम रहे है वो कह रहा अब में किसके साथ खेलूंगा और मस्ती करूंगा। बाबू कहा चले गए हो तुम रोहित छोटा है पर समझदार है वो खुद तो रो रहा था पर अपनी मां को गले लगाकर चुप करवा रहा था। यही हाल वैभव के छोटे तीन भाईयों का भी है।
एक साथ निकली दोनों की अंतिम यात्रा
एक्सीडेंट में जान गवाने वाले मामा भांजे की अंतिम यात्रा शाम को ६ बजे निकली दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ बैरागढ़ विश्रामघाट पर किया गया। दोनों के अंतिम संस्कार के दौरान वहंा मौजूद सभी लोगो की आंखे भर गई जहंा जहंा से अंतिम यात्रा निकली सभी की आंखे नम हो गई और दोनों को अंतिम विदाई दी गई।
परिवार की गरीबी दूर करने विदेश जाना चाहता था दिनेश
दिनेश डुलानी जो की बचपन से मेहनती था अत्यंत ही सरल स्वभाव के लिए पड़ोस में जाना जाता था वर्तमान में वो कपड़े की दुकान पर कार्य करता था। साथ ही सुबह पिता की होटल खोलता था परिवार की गरीबी को दूर करने के लिए वो विदेश जाकर कमाना चाहता था। इसलिए वो सुबह को सिंधु समाज स्कूल ५वीं की अंकसूची निकलवाने गया था ताकि पासपोर्ट बनवा सके। इसके लिए उसके पिता ने साथ चलने के लिए कहा था पर वो अकेला ही चला गया और अपनी चचेरी बहन के बेटे वैभव को लेकर गया। दिनेश का विदेश जाने का सपना अधुरा रह गया। पड़ोस में सब उस बाबू कहकर बुलाते थे।
शुक्रवार की सुबह एक्सीडेंट की खबर आग की तरह फैली जिसमें दो बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। दो घरो के चिराग बुझ गए। जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ आकर गिरा। दोनों ही परिवार गम में डूबे नजर आए। माता सुनीता व गीतू का रो रो कर बुरा हाल है उन्हें अभी भी बेटो के निधन पर विश्वास नहीं हो रहा है दोनो ही रो रो कर कह रही है कि सब कुछ लेलो बस मुझे मेरा बेटा लौटा दो। परिवार गम में डूबा हुआ है परिवार के अलावा संपूर्ण उपनगर भी गम में डुबा हुआ है।
उपनगर की सामाजिक संस्था पूज्य सिंधी पंचायत ने दिनेश व वैभव के दुखद निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धाजंलि दी और भगवान से प्रार्थना की गई कि परिवार को इस असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। श्रद्धाजंलि देने वालों में साबू रीझवानी, माधु चांदवानी, घनश्याम लालवानी, मामा गोबिंदराम केवलानी, नंद दादलानी, बबलू टेकचंदानी, महेश खटवानी, गुलाब जेठानी, नरेश चोटरानी, अशोक मोतियानी, कमल वीधानी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल थे।