शिव सर्व समर्थ हैं, देवों के देव महादेव। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि श्रावण मास में शिव की पूजा करने से सर्वसंकट खत्म हो जाते हैं। सावन मास के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर विशेष वस्तुएं अर्पण की जाती है जिसे शिवामुी कहते हैं। शिवामुट्ठी अर्पित करने से शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और सभी संकटों का नाश करते हैं।

  1. प्रथम सोमवार को कच्चे चावल एक मुट्ठी,
  2. दूसरे सोमवार को सफेद तिल् एक मुट्ठी,
  3. तीसरे सोमवार को खड़े मूँग एक मुट्ठी,
  4. चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी और
  5. यदि पांच सोमवार हो तो पांचवें सोमवार को एक मुठ्ठी सतुआ चढ़ाएं।

विशेष

यदि पांच सोमवार न हो तो आखरी सोमवार को दो मुट्ठी भोग अर्पित करते हैं।

सावन में शिव जी को राशि अनुसार लगाएंगे भोग तो दूर होंगे भय, दुख, रोग, शोक

सावन के पावन माह में हर भक्त अपने-अपने ढंग से भगवान भोलेनाथ को मनाने करने का प्रयास कर रहा है। आइए हम आपको बताते हैं कि इस माह आपको कौन सा प्रसाद चढ़ाकर शिवजी को प्रसन्न करना चाहिए। अगर आप अपनी राशि के अनुसार भोग-प्रसाद चढ़ाएंगे तो भोलेनाथ उसे तुरंत स्वीकार करेंगे।

मेष- शिवजी को गुड़ चढ़ाएं।
वृष- सफेद मिठाई का प्रसाद लगाएं।
मिथुन- इमरती का प्रसाद चढ़ाएं।
कर्क- पांच प्रकार के सूखे मेवे चढ़ाएं।
सिंह- शिव को खीर का भोग लगाएं।
कन्या- भगवान शंकर को मालपुए चढ़ाएं।
तुला- दूध मिश्री का भोग लगाएं।
धनु- केसरयुक्त पेड़े चढ़ाएं।
वृश्चिक- बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
मकर- खोपरापाक का प्रसाद शुभ होगा।
कुंभ- गुलगुले पूरी का भोग लगाएं।
मीन- ड्रायफ्रूट मिश्रित हलवे का भोग लगाएं।

श्रावण में जरूर धारण करें रुद्राक्ष हर ग्रह का है एक खास रुद्राक्ष

श्रावण मास में शिव-आराधन का विशेष महत्व है। शिवजी को प्रिय लगने वाले सभी चीजें श्रावण मास में संपन्न की जाती हैं चाहे वह अभिषेक हो, स्तुति हो, बिल्वपत्र अर्पण हो या फिर रुद्राक्ष धारण करना। पौराणिक कथाओं के अनुसार रुद्राक्ष को शिवजी की आंख का अश्रु माना गया है।

वास्तविक रूप में रुद्राक्ष एक फल की गुठली होता है। इस वृक्ष की सर्वाधिक पैदावार दक्षिण-पूर्व एशिया में होती है। रुद्राक्ष का वृक्ष एक सदाबहार वनस्पति है, जिसकी ऊंचाई 50 से 60 फीट तक होती है। रुद्राक्ष के वृक्ष के पत्ते लंबे होते हैं। यह एक कठोर तने वाला वृक्ष होता है। रुद्राक्ष के वृक्ष का फूल सफेद रंग का होता है और इसमें लगने वाला फल शुरू में हरा, पकने पर नीला एवं सूखने पर काला हो जाता है। रुद्राक्ष इसी काले फल की गुठली होता है। इसमें दरार के सदृश दिखने वाली धारियां होती हैं जिन्हें प्रचलित भाषा में रुद्राक्ष का मुख कहा जाता है। ये धारियां 1 से लेकर 14 तक की संख्या में हो सकती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार एकमुखी रुद्राक्ष अतिशुभ माना जाता है। इसे साक्षात शिव का स्वरूप माना गया है, वहीं दोमुखी रुद्राक्ष को शिव-पार्वती का संयुक्त रूप माना जाता है।

ज्योतिष में रुद्राक्ष का महत्व

अनिष्ट ग्रहों की शांति हेतु रुद्राक्ष धारण की अहम भूमिका होती है। रुद्राक्ष को लाल रेशमी धागे में धारण करने से अनिष्ट ग्रहों के दुष्प्रभावों में कमी आती है।

किस ग्रह की शांति के लिए कौन सा रुद्राक्ष

1. सूर्य – एकमुखी
2. चन्द्र – दोमुखी
3. मंगल – तीनमुखी
4. बुध – चारमुखी
5. गुरु – पांचमुखी
6. शुक्र – छहमुखी
7. शनि – सातमुखी
8. राहु – आठमुखी
9. केतु – नौमुख

रुद्राक्ष कैसे धारण करें ?

रुद्राक्ष धारण करने के लिए श्रावण मास सर्वाधिक उत्तम रहता है। आप श्रावण मास के सोमवार के दिन अपने लिए उपयुक्त रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं। सर्वप्रथम भगवान भोलेनाथ की यथाशक्ति पूजा-अर्चना करें तत्पश्चात रुद्राक्ष को शिवलिंग पर अर्पण करें। इसके उपरांत स्वयं रुद्राक्ष को धारण करें।

क्या महिलाएं भी धारण कर सकती हैं रुद्राक्ष ?

सामान्यत: महिलाओं के रुद्राक्ष धारण करने की परंपरा नहीं है, केवल साध्वियां ही रुद्राक्ष धारण करते देखी गई हैं। किंतु वर्तमान समय में महिलाओं में भी रुद्राक्ष धारण करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। हमारे मतानुसार यदि महिलाएं रुद्राक्ष धारण करें तो अशुद्धावस्था आने से पूर्व इसे उतार दें एवं शुद्धावस्था प्राप्त होने पर पुन: धारण करें।