नगर प्रतिनिधि,संतनगर : मध्यप्रदेश में अगली सरकार किसकी होगी यह स्थिति अब साफ हो गई है पिछले 15 वर्षो से प्रदेश में भाजपा की सरकार थी पर चौथी बार सरकार बनाने का जो सपना था वो पूरा नहीं हो सका। इसमें थोड़ी सी क मी रह गई। वहीं दूसरी तरफ बात की जायें तो प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की फिर वापसी हुई है। 15 साल से वनवास क्षेल रही कांग्रेस पार्टी ने सत्ता को हासिल कर ली है जो कांटो के ताज के सम्मान है सरकार चलाना आसान नहीं होगा। सरकार बदलने से काफी बदलाव भी नजर आयेगा। भोपाल की बात की जायें तो यहां से इस बार ४ भाजपा के विधायक है तो ३ कांग्रेस के विधायक चुनकर आये है प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से इन ३ विधायकों की पूछ परख बढ़ जाएगी। भाजपा विपक्ष का रोल अदा करेगी वहीं हुजूर सीट की बात की जायें तो रामेश्वर शर्मा दूसरी बार यहां से विधायक चुनकर आये है ऐसे में अब देखना यह है कि दूसरी पारी में विधायक उपनगर की समस्याओं को हल करवा पायेंगे या नहीं क्योंकि अब प्रदेश में सरकार कांग्रेस की बन गई है उपनगर में समस्याओं का अंबार है शहर का जिस प्रकार विकास होना चाहिए वो नहीं हो पाया है आज भी यहां की जनता मुलभूत सुविधाओं सहित विकास के लिए तरस रही है इससे पहले जब विधायक थे उस दौरान प्रदेश में भाजपा की सरकार थी उस दौरान भी विकास की योजनाएं तो बनाई गई पर किसी ना किसी कारणवंश उन योजनाओं पर अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। ऐसे में अब वो योजनायें पूरी होगी या नहीं यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। इसमें प्रमुख रूप से टेकरी पर पर्यटन स्थल, फाटक रोड पर आरओबी, गुलाब उद्यान, खेल मैदान शामिल है।

अब बदल गई परिस्थितिया

प्रदेश में अब कांग्रेस की सरकार बन गई है ऐसे में अब परिस्थितियां भी बदल जायेगी। ऐसे में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा कैसे अपने क्षेत्र का विकास करवाते है यह एक चुनौती होगी चुनाव के दौरान की गई घोषणाओं को भी कैसे पूरा करते है यह आने वाला समय बतायेगा। प्रदेश के हालात अब बदल गए है और भाजपा अब विपक्ष की भूमिका में नजर आयेगी। जिस पार्टी का विधायक होता है अगर वो ही पार्टी प्रदेश में होती है तो इसका लाभ मिलता है इस बार हुजूर के विधायक भाजपा के है तो प्रदेश में सरकार कांग्रेस की है, ऐसे में कैसे क्षेत्र की समस्याओं का समाधान होगा और विकास यह देखना होगा।

उपनगर की समस्याएं एक नजर में

मर्जर समस्या से मुक्ति, फाटक रोड पर आरओबी, रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव, गुलाब उद्यान, खेल मैदान, दशहरा मैदान का सौदर्यीकरण, टेकरी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना, सिंधी समाज के मालिकाना हक का मामला, झुग्गी मुक्त करवाना, मुप्तय मार्ग पर कारीडोर की समस्या।

ज्ञानचंदानी घर बैठेंगे या करेंगे राजनीति

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी चुनाव में हारने के बाद घर बैठेंगे या राजनीति करेंगे यह भी एक बड़ा सवाल है हुजूर की जनता ने उन्हें भरपूर आशीर्वाद दिया है और जनता की उनसे उम्मीद जुड़ गई है अब नरेश को भी जनता की इस उम्मीद पर खरा उतरने की जरूरत है वो हुजूर से चुनाव हारे है पर प्रदेश में सरकार उन्हीं की है। और सभी बड़े नेताओं से नरेश के संबंध मधुर है जिसके चलते भी वो क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करवा सकते है हुजूर सीट पर जो कांग्रेस का अस्तित्व समाप्त होता दिख रहा था वो वापस लौट आया है जिसे बरकरार रखना भी जरूरी है इसके लिए नरेश ज्ञानचंदानी को क्षेत्र में सक्रियता बनाये रखनी होगी।

ईसरानी की बढ़ेगी सक्रियता

भाजपा व कांग्रेस पार्टी से भोपाल की सेंट्रल पंचायत द्वारा सिंधी समाज को टिकट देने की मांग की जा रही थी इस मांग को कांग्रेस पार्टी ने पूरा भी किया है जिसके चलते ही सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष भगवानदेव ईसरानी ने कांग्रेस को समर्थन भी दिया। श्री ईसरानी पिछले काफी समय से सिंधी समाज के लिए सक्रिय है जिसका लाभ उन्हें मिल सकता है भगवानदेव ईसरानी विधानसभा में पूर्व प्रमुख सचिव रह चुके है। ऐसे में उन्हें हर एक पहलू की जानकारी है उन्हें नियम कायदों का भी ज्ञान है उनके पास काफी अनुभव भी है ऐसे में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन रही है और मुप्तयमंत्री कमलनाथ बन रहे है जिसका लाभ ईसरानी को मिल सकता है और उन्हें किसी बड़े पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है कांग्रेस पार्टी सिंधी समाज के नेता को भी पद दे सकती है जिसमें प्रमुख रूप से भगवानदेव ईसरानी के अलावा कांग्रेस प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी, त्रिलोक दीपानी, केलाश बेगवानी, प्रकाश आसुदानी शामिल है।