दुर्गा पूजन के लिए विभिन्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है जिनमे निम्न वस्तुए सम्मिलित है।
  • देवी मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र।
  • जल भरने हेतु तांबे का लोटा।
  • जल का कलश।
  • प्रसाद के लिए दूध।
  • देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण।
  • प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, पंचामृत( दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा।
  • गुड़हल के फूल, नारियल।
  • चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध।

माँ दुर्गा की पूजा कैसे करे

 

  • नवरात्री पूजा से पहले भी गणपति पूजा की जाती है. नवरात्री में गणेश जी को कलश के रूप में स्थापित किया जाता है. हिन्दू धर्म में कलश स्थापना के लिए विशेष विधि अपनायी जाती है. जिसे जानने के लिए यह पढ़े : नवरात्री कलश स्थापना विधि.
  • गणपति पूजन के बाद संकल्प लिया जाता है जिसके लिए हाथों में जल, फूल व चावल लें। सकंल्प लेते समय जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम, अपना गोत्र आदि बोलकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें।

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  • सबसे पहले जिस मूर्ति में माता दुर्गा की पूजा की जानी है उस पर गंगा जल छिडककर उसे शुद्ध कर ले। अब उस मूर्ति में माता दुर्गा का आवाहन करें।
  • इसके बाद किसी स्वच्छ स्थान पर माता दुर्गा को आसन दें।
  • अब माता दुर्गा को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं।
  • इसके बाद माता दुर्गा को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं।
  • अब पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें, तिलक करें। तिलक के लिए कुमकुम, अष्टगंध का प्रयोग करें।
  • माँ दुर्गा को धूप व दीप अर्पित करें। माता दुर्गा की पूजन में दूर्वा को अर्पित नहीं करें। लाल गुड़हल के फूल अर्पित करें। 11 या 21 चावल अर्पित करें।
  • श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें।
  • आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें।
  • माता दुर्गा की आराधना के समय ‘‘ऊँ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का जप करते रहें।
  • माँ दुर्गा का पूजन पूरा होने पर नारियल का भोग अवश्य लगाएं।
  • माता दुर्गा की प्रतिमा के सामने नारियल अर्पित करें। 10-15 मिनिट के बाद नारियल को फोड़े।
  • अब प्रसाद देवी को अर्पित कर भक्तों में बांटें।

क्षमा-प्रार्थना :-

यदि आपसे माँ के पूजन में कोई त्रुटि हो गयी है या आप किसी कार्य को करना भूल गए है तो अपनी इस भूल के लिए दुर्गा माता से क्षमा मांगे। क्षमा-याचना आपकी दुर्गा सप्शती की पुस्तक में मिल जाएगी।