विधानसभा के बाद लोक सभा चुनाव पर पड़ सकता है असर

छोटे व्यापारियों का व्यापार करना मुश्किल, टैक्स भरने में आ रही परेशानी

नगर प्रतिनिधि,संतनगर : केंद्र सरकार द्वारा जहां पहले नोटबंदी जैसा बड़ा फैसला लिया गया था जिससे व्यापारी व लोग उबर नहीं पायें थे और तत्काल ही जीएसटी टैक्स बंद बोतल से बाहर आ गया और कारोबारियों की नींद उड़ गई एक देश एक टैक्स जीएसटी के रूप में लागू कर दिया गया। जिसे दो साल बीतने को है पर अभी तक ना तो जीएसटी के बारे में व्यापारी समझ पाया है ना ही सीए को ही कुछ पल्ले पड़ रहा है प्रतिदिन आ रहे नये नये संशोधनो के चलते व्यापार करना मुश्किल हो गया है नोटबंदी व जीएसटी जैसे टैक्स का सबसे ज्यादा असर कपड़ा कारोबारियों पर पड़ा है इन बड़े फैसलों के चलते ही भाजपा सरकार तीन राज्यों में चुनाव हार गई है अगर ऐसा ही हाल रहा तो इसका असर लोक सभा चुनाव पर भी पड़ सकता है मध्यप्रदेश कपड़ा व्यापारी संघ के उपाध्यक्ष वासदेव वाधवानी का व्यापार समाप्त होता जा रहा है एक माह में तीन तीन बार रिटर्न भरने की पालीसी भी व्यापारियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है खरीदी के अलावा ब्रिकी की जानकारी १० दिन में मांगी जाती है ऐसे में व्यापार करें या रिटर्न की जानकारी देते रहे आजादी के बाद से कपड़े को टैक्स से दूर रखा गया है कपड़ा हर व्यक्ति की जरूरत है इसे कर मुफ्त किया जाना चाहिए। जहां पर मेनीफैक्चरिंग होता है वहीं पर ही कर लगाया जायें जहां जहां भी कपड़े का बड़ा व्यापार होता है वहां पर भाजपा को हार मिल रही है देश में सबसे ज्यादा क पड़े का कारोबार गुजरात, मप्र, छतीसगढ़, राजस्थान, तेलगाना में होता है इनमें से तीन राज्यो में भाजपा से सत्ता चली गई है जीएसटी के बाद से बेरोजगारी भी बढ़ गई है जल्द ही अगर जीएसटी टैक्स में सरलीक रण नहीं किया जाता है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है टैक्स के बारे में व्यापारी तो क्या सीए भी अभी तक नहीं समझ पा रहा है छोटे दुकानदार भी भगवान भरोसे व्यवसाय कर रहे है दिनभर खरीदी ब्रिकी का हिसाब किताब बनाने में लग रहा है वाधवानी ने कहा कि जल्द ही इसको लेकर व्यापारियों के साथ अधिकारी बैठक कर उनकी परेशानियों को समझे और जीएसटी के दौरान आ रही रूकावट को दूर करें। अन्यथा व्यापार करना मुश्किल हो गया।