वो जिसके हाथ में छाले हैं..पैरों में बिवाई है, उसी के दम से रौनक आपके बंगले में है आई..
अदम गोंडवी की यह लाइनें महाराष्ट्र में आंदोलनरत किसानों पर फिट बैठती हैं। जिन किसानों को भारत का अन्नदाता कहा जाता है। जिन किसानों पर देश का पेट भरने की जिम्मेदारी है। वह खुद बिना अन्न के अपनी यात्रा को पूरा कर रहे थे। उनके इस सफर में साथ निभा रहा था मुंबई का वड़ा पाव। 
 
200 किलोमीटर लंबी यह यात्रा किसानों ने पैर में छाले, माथे पर पसीना और वड़ा-पाव खाकर पूरी की। नासिक से मुंबई के बीच किसान एकजुट होकर चलते जा रहे थे। बीच में कई पड़ाव ऐसे आए, जहां किसानों को कई किलोमीटर तक न तो खाने का कोई सामान मिला और न ही पीने का पानी नसीब हुआ। रास्ते में जिस भी इलाके में बाजार मिला, वहां किसानों ने अपने पेट की आग बुझाई।

कम दाम में पेट भरने के लिए आपको महाराष्ट्र में वड़ा-पाव से बेहतर कोई विकल्प नहीं मिलेगा। तंगहाल किसान भी रास्ते भर वड़ा पाव के सहारे मुंबई का रास्ता तय करते नजर आए।