मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल, देगा ज्ञापन

उपनगर की अग्रणी सामाजिक संस्था सिंधी सेन्ट्रल पंचायत ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक अप्रैल को सीएम हाऊस में आयोजित चैटीचंड समारोह में प्रदेश के सिंधी विस्थापित परिवारों को दुकान, मकान व भू-खंड बावत जो घोषणा की,इसके बाद 3 अप्रैल को राजस्व विभाग ने प्रदेश के समस्त कलेक्टरों को जो परिपत्र जारी किया है, वह विसंगतिपूर्ण है जो पूर्व के पत्रों के विपरीत है जो मुख्यमंत्री की घोषणा से मेल नहीं खाता। संस्थापक नानक चंदनानी, अध्यक्ष एन.डी. खेमचंदानी, वासुदेव वाधवानी, सुरेश जसवानी, रमेश हिंगोरानी ने कहा है कि इस परिपत्र में कहा गया है कि ऐसे विस्थापितों को जिन्होंने आवंटित भू-खण्ड के भू- खंड के भूमि उपयोग में बिना किसी विधिक अनुज्ञा के परिवर्तन कर लिया है और ऐसा परिवर्तन कर लिया है,और ऐसा परिवर्तन तत्स्थानी विकास योजना में ऐसे भू-खंड के लिए निर्धारित प्रयोजन केउ अनुरूप् है, वहां ऐसे परिवर्तन को इस शर्त पर मान्य किया जाए कि भू-खंड धारक ऐसे भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए मध्यप्रदेश भूराजस्व संहिता 1956 की धारा 59 के अधीन बने नियमों केउ अनुक्रम में वर्तमान प्रचलित देया प्रीमियम एवं संगणित वार्षि भू-भाटक के भुगतान केउलिए सहत हो और आदेश रिनाक तक की बकाया राशि की एकमुश्त की अदायती करे।

मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

राजस्व विभाग ने अपने ताजा परिवत्र में 9 जुलाई 1986 एवं 18 फरवरी 1994 के जिन परिपत्रों का उल्लेख किया है, उसमें स्पष्ट किया गया है कि जिनका कब्जा 31 दिसम्बर 1970 के पूर्व है, उन्हें अधिकतम 4800 वर्गफिट तक की भूमि के लिए प्रब्याजी रूपये 500 तथा वार्षिक भू-भाटक 31.25 रूपये वसूली जाए। यहां बता दें कि प्रदेश में जितने भी सिंधी विस्थापित हैं, उन सभी का कब्जा 1970 के पूर्व का ही है और वर्तमान में एक दो प्रतिशत को छोड़कर एक भी ऐसा परिवार नहीं बचा है सिंधी सेन्ट्रल पंचायत पदाधिकारियों ने कहा है कि वह जल्द शिवराजसिंह चौहान से मुलाकात कर ज्ञापन प्रस्तुत करेगी और प्रदेशभर के सिंधी परिवार जिस स्थिति में निवास कर रहे हैं, उन्हें अधिकतम 4800 वर्गफिट का स्थान पुरानी दर पर आवंटित कर पट्टा एवं मालिकाना हक प्रदान करने के अलावा जिन पट्टों का नवीनीकरण होना है, उसमें भी तत्परता दिखाने की मांग करेगी।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा था

इसके विरीत मुख्यमंत्री शिवराजं सिंह चौहान ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि जहां सिंधी परिवार बसे हुए हैं, वहां समय के साथ परिवर्तन होना स्वाभाविक है। अगर किसी परिवार ने अपने मकान के आगे दुकान बनाकर वहां रोजगार करना शुरू कर दिया तो वह निश्चित था इसलिए ऐसी नीति बनाई जा रही है, जिससे वर्तमान में मौजूद व्यक्ति फिर चाहे वह पोता, नाती या कोई भी वारिस हो, उसे उसी स्वरूप में पट्टा प्रदान किया जाएगा जबकि राजस्व विभाग भू-खंड में परिवर्तन के लिए एकमुश्त राशि की बात कह रहा है। अगर राजस्व विभाग ने भू-खंड में परिवर्तन के बदले एकमुश्त राशि वसूली तो यह सीएम की घोषणा के विपरीत होगा।