इंदौर क्राइम ब्रांच ने की कार्रवाई, बैरागढ़ के तीन युवक भी शामिल

इंदौर/भोपाल : प्रदेश के इंदौर शहर में नकली नोट बनाकर मार्केट में चलाने वाले एक गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया गया है पकड़े गए छ: सदस्यों में से तीन युवक बैरागढ़ शहर के बतायें जा रहे है मंगलवार को नकली नोट छापने वाले गिरोह के 6 सदस्यों को गिर तार किया। आरोपियों के पास से पुलिस ने 2000, 500, 100 और 50 रुपए के 93 हजार रुपए के नकली नोट जब्त किए। इन्होंने अपना नेटवर्क इंदौर और भोपाल में फैला रखा है। आरोपी एक ही सीरियल नंबर के कई नोट छापते थे और इन्हें छोटे दुकानदारों या फिर पेट्रोल पंपों पर चलाते थे। ये अब तक बाजार में लाखों रुपए के नोट खपा चुके हैं।

पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि आनंद बाजार में राजेश नामक व्यक्ति आरके ह्रश्वलास्टिक की दुकान पर नकली नोट छापकर साथियों के साथ बाजार में खपा रहा है। सूचना के बाद टीम ने दबिश तो यहां 6 संदिग्ध व्यक्ति पकड़ में आए। इन्होंने अपना नाम जितेंद्र पिता लक्ष्मण पारदासानी निवासी बैरागढ़ भोपाल, मुरली पिता धर्मेंद्र अग्रवाल निवासी बैरागढ़, भरत पिता लक्ष्मणदास साधवानी निवासी बैरागढ़, राजेश पिता कन्हैयालाल गंधवानी निवासी आनंद बाजार इंदौर, अभिषेक पिता ताराचंद निवासी खजराना इंदौर और विजय पिता मुन्नालाल रायकवार निवासी खजरानी इंदौर बताया।

टीम ने दुकान की तलाशी ली तो यहां 2000 के 44 नोट, 500 के तीन नोट, 200 के पांच नोट, 100 के 24 नोट और 50 के दो नकली नोट मिले। इसके अलावा एक कलर प्रिंटर भी पुलिस ने बरामद किया। पुलिस ने सभी आरोपियों पर केस दर्ज कर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि भोपाल निवासी जितेंद्र जाली नोट बनाने वाली गिरोह का सरगना है। वह असली नोट को कलर प्रिंटर के जरिए स्कैन कर जाली नोट तैयार करता था।

वह इन को दोस्तों की मदद से बाजार में खपाता था। ये नोट इंदौर में आसानी से चल जाते थे, इसलिए उसने राजेश के साथ मिलकर यहां नोट चलाने का काम तेज कर दिया। इन्होंने इंदौर में ही नकली नोट छापने का काम शुरू कर दिया। इंदौर में राजेश और जितेंद्र साथियों के साथ नोट खपा रह थे, वहीं भोपाल में मुरली और भरत के जरिए नकली नोट बाजार तक पहुंच रहे थे। आरोपी प्रिंटर और जीएसएम कागज के जरिए नकली नोट छापता था।

ये नोट में वाटरमार्क और स्याही को भी बारीकी से देखते थे। इनके द्वारा बनाए गए नोटों को एक झलक में पहचान पाना मुश्किल होता था। आरोपियों बताया कि ये एक ही सीरियल नंबर के कई नोट छापते थे। आरोपी जितेंद्र ने बताया कि उसने बैंक से होम लोन ले रखा था, उसे चुका नहीं पाने से बैंक ने दिवालिया घोषित कर दिया था।

पैसों की तंगी के चलते यह काम शुरू कर दिया। आरोपी ये नोट छोटे दुकानदारों या फिर पेट्रोल पंप पर चलाते थे। आरोपी एक साल से इस गोरख धंधे में लगे हुए थे। इन्होंने अब तक बाजार में लाखों रुपए के नोट खपा दिए हैं। पुलिस आरोपियों से नोट चलाने से संबंधित जानकारी जुटा रही है।