परिश्रम के साथ भगवान का भजन करने वालों के जीवन का केंद्र बिंदु परमात्मा हो जाता है: आचार्य श्री

प्रभु भजन का नशा सभी प्रकार के नशे पर भारी है

नगर प्रतिनिधि,संतनगर : आचार्य श्री मृदुल कृष्ण जी महाराज के श्रीमुख से चल रही श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव एवं नंदोत्सव धूम धाम से मनाया गया। 10 हज़ार से अधिक श्रद्धालुओ ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के मंगल गीत आचार्य श्री मृदुल कृष्ण जी के साथ गाये , हो रई ब्रज में जय जयकार….. के नंद के घर लाला आयो है … के भजन पर पूरा पंडाल झूम उठा . पंडाल में उपस्थित हर व्यक्ति को झूमते और नाचते हुए आचार्य श्री ने कहा की जो बांके बिहारी के सामने नृत्य करता है उसे संसार में कोई नचा नहीं सकता। जो जितना यहाँ उचक उचक कर नाचेगा वह उतनी उन्नति करेगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अवसर पर मिष्ठान और खिलोने लुटाये। श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस विधायक हुजूर कर्मश्री के अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने सपत्निक श्रीमती संगीता शर्मा के साथ विधिवत रूप से व्यास गादी की पूजा अर्चना की इस दौरान कई गणमान्य नागरिक शामिल थे।

MAHARAJ
युवा परिश्रम के साथ भगवान का भजन अवश्य करें

आचार्य श्री मृदुल कृष्ण जी ने कहा की युवा किसी भी कार्य क्षेत्र में परिश्रम करें परन्तु भगवान का भजन संकीर्तन उनकी आरधना अवश्य करें। ऐसा करने वालो का कभी आत्मबल कमजोर नहीं होगा परिश्रम के साथ भगवान का भजन करने वालो के जीवन का केंद्र बिंदु परमात्मा हो जाते है इस दशा में आपकी दिशा गलत जा रही हो तो भगवान उसे सही दिशा देने का काम करते है।

ह्रदय से गाया हुआ भजन प्रभु के ह्रदय तक पहुँचता है

भक्त और भगवान का स२बन्ध जन्म जन्मान्तर का है इस कलिकाल में भगवान से जुडऩे का एक माध्यम है उनके नाम का भजन, आचार्य श्री ने कहा की ह्रदय से किया गया प्रभु भजन प्रभु के ह्रदय तक पहुँचता है। उन्होंने कहा की गीत होंठो से गाया जाता है परन्तु भजन ह्रदय से गाया जाता है। आचार्य श्री मृदुल कृष्ण जी ने कहा की आज का युवा पश्च्यात संस्कृति की और अपना रुझान रखता है फि़ल्मी गीत नशे की लत का शिकार हो जाता है ऐसे युवाओ से मेरा कहना है की वह प्रभु के भजनों से जुड़े फि़ल्मी गाने आपको वासना से जोड़ते है परन्तु भजन आपको प्रभु की उपासना से जोड़ता है उन्होंने अपने पुत्र आचार्य श्री गौरव कृष्ण जी से आधुनिक संगीत के साथ भगवान श्रीराम- श्री कृष्ण के शब्दों वाले भजनों से युवा पीढ़ी को सत्संग से जोडऩे को कहा है ऐसा इसलिए क्यूंकि लोहा ही लोहे को काटता है। प्रभु भजन का नशा सभी प्रकार के नशे पर भारी है संस्कृति में नशा को न शंकय: कहा गया है अर्थात जिसके सेवन के बाद शांति न मिले उसे नशा कहा जाता है। शनिवार को श्रीमद भागवत कथा में गिरिराज भगवान की कथा एवं भोग लगाया जायेगा आज आचार्य श्री ने कहा की गिरिराज भगवान को अपने घर की रसोई से शुद्ध प्रसाद बनाकर अर्पित करें , भगवान श्री गिरिराज को भोग लगाने के वाले के घर में कभी अन्न की कमी नहीं हो सकती।

माया रूपी पर्दे को हटाओ भगवान के दर्शन होंगे

आचार्य श्री मृदुल कृष्ण ने बताया की वन गमन के दौरान श्रीराम से लक्ष्मण द्वारा पूछे गए सवाल माया क्या है ? इस प्रशन के जवाब में भगवान श्रीराम ने माया का प्रतिपादन क रते हुए कहा की मेरा तेरा यह द्वन्द ही माया है। माया के दो रूप है विद्या रूपी माया ,इस माया से प्रभु आश्रय लेकर संसार की रचना करते है अविद्या रूपी माया व्यक्ति को संसार में फंसा देती है। भगवान कहते है संसार में जो है उसे छुपा दिया जो नहीं है उसे दिखा दिया यही माया है। माया के पीछे भगवान का वास होता है अपने जीवन से माया के पर्दे को हटाकर भगवान के दर्शन संभव है। हम नित जो क्रिया कर रहे है वो हम नहीं कर रहे बल्कि भगवान श्री हरी हमसे करवा रहे है, हमारे द्वारा किए गए हर कार्य का अभिमान त्याग कर यह सब जो हो रहा है प्रभु की कृपा से हो रहा है यह हमें सदैव कहना चाहिए।

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